बुधवार, 3 जून 2020

जॉर्ज फ्लॉयड की हत्या: कितना निर्दयी रहा अमेरिका नस्लीय भेदभाव का इतिहास - Murder of George Floyd: How merciless America is a history of racial discrimination


जॉर्ज फ्लॉयड की हत्या: कितना निर्दयी रहा अमेरिका (USA) नस्लीय भेदभाव का इतिहास

 Murder of George Floyd: How merciless America (USA) is a history of racial discrimination

25 मई को George Floyd नाम के अश्वेत (Black) अमेरिकी को Minneapolis में उसे पकड़ने के क्रम में एक पुलिस ऑफिसर उसके गले को 8 मिनट तक घुटने से दबा कर रखता  है जिससे उसकी मौत हो जाती है। वह बार-बार कह रहा था कि “I can’t breath” लेकिन तक भी उस पुलिस वाले का दिल नहीं पसीजता है । 

कई लोगों द्वारा इस पूरी घटना का वीडियो बना लिया जाता है और जब यह वीडियो आम लोगों तक पहुँचता है तक इस घटना के प्रति लोगों का जनाक्रोश भड़क उठता है। अश्वेतों (black) के प्रति पुलिस या प्रशासन द्वारा रंगभेदी या नस्लीय (racist) व्यवहार या हमला पहला नहीं है, इसका एक लंबा इतिहास है। आइए, इस इतिहास पर दृष्टि डालते है। 

15वी सदी कर अंत में बहुत सारे यूरोपीय भारत के नए समुद्री मार्ग की तलाश में निकलते है। उसमें वास्को डी गामा तो भारत पहुंच जाते है जबकि कोलंबस एक नई भूमि में कदम रखते है ,जिसे बाद में अमेरिका (America) नाम दिया जाता है और विश्व मानचित्र में एक नया भूभाग उभरता है। 

उत्तर अमेरिका (North America) उस समय बहुत बड़ा भूभाग वाला प्रदेश था एवं वहाँ की मूलवासी red Indians की आबादी काफी कम थी। धीरे धीरे और यूरोपीय लोग आने लगे एवं वहाँ बसने लगे। कुछ सालों में ही यूरोपीयो का उस भूभाग में कब्ज हो गया। 

ये लोग वहां खेती, बागवानी एवं खनन के कार्यों में जुड़ गए, जिससे उन यूरोपीय लोगों को सस्ते मजदूरों की जरूरत हुई। लगभग पूरी अफ्रीका भी  उस समय यूरोप के देशों की कालोनी बन  चुकी थी, अफ्रीका से नीग्रो लोगों गुलाम बना कर उत्तरी अमेरिका में बेचा जाने लगा। तब से अमेरिका में दास प्रथा (slavery) की शुरुवात हुई। यूरोप में दासों (slaves) का व्यापार कानूनी रूप से वैध (legal) था। 

दास प्रथा (slavery) एक अमानवीय प्रथा थी जिसमें दासों के साथ जानवर से बुरा सलूक किया जाता था। दास उनके मालिकों के निजी संपत्ति बन जाते थे, जिसके साथ वे मार पीट कर सकते थे, उनकी हत्या भी कर सकते थे। 12 Years as a Slave और Django Unchained  जैसे हॉलीवुड के मूवी में इस दास प्रथा की वीभत्स रूप को वास्तविकता से दर्शाया गया है। 

18वी सदी में लगभग सभी यूरोपीय देशों से दास प्रथा (slavery) को समाप्त कर दिया गया। 1783 में इंग्लैंड के औपनिवेशिक (colony) शासन से उत्तरी अमेरिका (USA) के बाहर निकल जाने पर भी वहाँ दास प्रथा बदस्तूर जारी रहा। 

अमेरिका (USA) के 16वे राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन ( 1861- 65) के दास प्रथा(slavery) कई महत्वपूर्ण मुद्दों में एक था, जो उत्तरी और दक्षिणी अमेरिकी राज्यों के बीच civil war का कारण बना। 1865 में civil war के समाप्त होते ही अश्वेतों (blacks) की दासता समाप्त कर दी गई। अब उनके साथ गुलामो जैसा व्यवहार नहीं किया जा सकता था, लेकिन तब भी उन्हें श्वेतो (whites) से बराबरी का अधिकार नहीं मिला।

1868 के USA के 14वे संविधान संशोधन से अश्वेतों को नागरिकता मिली, लेकिन भेदभाव पूर्ण व्यवहार जारी रहा। 
भेदभावपूर्ण व्यवहार केवल लोगों या पुलिस द्वारा ही नहीं किया जाता था बल्कि न्यायपालिका (court)  द्वारा भी किया जाता था। 1944 में एक 14 साल के George Stinney नामक अश्वेत बालक को 2 बच्चों की हत्या के जुर्म के इलेक्ट्रिक चेयर द्वारा मौत की सजा दी जाती है। 2004 में पुनः इस केस को re examine किया जाता है जिसमें पाया जाता है कि उसे fair trail नहीं मिला था। 

महात्मा गांधी को आदर्श मानने वाले मार्टिन लूथर किंग जूनियर USA में 1955 से Civil Rights Movement चलाया और इस movement में गांधीवादी साधन अहिंसा ( non- violence) और सविनय अवज्ञा (civil disobedience) का प्रयोग किया। इसी मूवमेंट के बाद 1964 में Civil Rights Act  पारित किया गया, जिससे सभी प्रकार के  अश्वेतों के प्रति सभी कानूनी भेदभाव को समाप्त कर दिया गया। अब वैधानिक रूप से अश्वेतों(blacks) को श्वेतों(whites) जैसा सभी अधिकार मिल गए। 

वर्तमान में अश्वेतों के साथ होने वाले भेदभाव की बात करें तो 50 साल पहले की तुलना में काफी कम है लेकिन समाप्त नहीं हुई है। अब भी अश्वेतों को कई racist अमेरिकनों द्वारा नस्लीय भेदभाव का सामना करना पड़ता है। 2018 में USA में नस्ल के आधार पर Hate Crime अश्वेतों के प्रति 2426 मामले दर्ज हुए,जो अन्यों से हुए नस्ल के आधार पर Hate Crime में सबसे ज्यादा थे।

अब इतिहास के बाद वर्तमान घटना की बात करें तो अब विरोध प्रदर्शन घिनौना रूप ले चुका है। Anti Republican, Anti American, ANTIFA  जैसे समूह इसे हिंसक बना रहे है। अब वे हिंसक हमले,  लूट पाट, सम्पतियों को नुकसान पहुंचा रहे है। 






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