शनिवार, 6 जून 2020

कितनी सच्चाई है, Covid 19 के इलाज़ मे प्रयोग किए जाने वाले दवाओ के दावो में! - Truth in the claims of medicines used in the treatment of Covid!

truth in the claims of medicines used in the treatment of Covid
 medicines used in the treatment of Covid 19,Image by Ирина Ирина from Pixabay 


कितनी सच्चाई है, Covid 19 के इलाज़ मे प्रयोग किए जाने वाले दवाओ के दावो में! 
What is the truth, in the claims of medicines used in the treatment of Covid 19!

दिसम्बर 2019 से मानव जाति का नई प्रकार के वाइरस से सामना हुआ, हमलोगो की इसके विरुद्ध immunity नहीं थी और ना ही कोई दवा (medicine) Respiratory disease होने के कारण तेजी से पूरे विश्व में फैलने लगी। वैसे तो स्वस्थ्य व्यक्ति को इस वाइरस से खतरा काफी कम है लेकिन Diabetes, heart disease आदि बढ़ती उम्र से संबन्धित बीमारियो से पहले से ग्रसित उम्रदराज लोगो के लिए यह वाइरस घातक सिद्ध होने लगा।

जब यह pandemic (वैश्विक महामारी) का रूप लेने लगा तो पूरे विश्व में इससे बचाव के लिए दवा की खोज के प्रयत्न लिए जाने लगे। लक्षण के अनुसार कई पुरानी दवाओ के भी प्रोयोग किए जाने लगे।

कई दवाओ के बारे मे यह दावा किया जाने लगा कि कोरोना वाइरस के प्रति प्रभावी है। Allopath (एलोपेथी) के अलावा आयुर्वेदिक एवं होमियोपेथी में भी कई दावे किए गए, लेकिन यह ज्यदातर immunity (रोग प्रतिरोधक क्षमता) से संबधित है। अब एक एक करके इन दवाओ कि स्थिति को देखते है कि क्या कहते है विश्व के health expert और संगठन।

   1.   Hydroxichloroquine :- यह मलेरिया की काफी प्रभावी पुरानी दवा है, शुरू से ही इस दवा का कोरोना के प्रति काफी प्रभावी (effective) माना गया था। US president ने जब twitter पर भारत से यह दवा की मांग की तब इस दवा को काफी global attention मिला । जर्मनी एवं ब्राज़ील जैसे देशो ने भी भारत से मदद मांगी । भारत ने भी इस महामारी के बीच लगभग 100 देशो को यह दवा उपलब्ध कराई। लेकिन इसकी effectiveness और side effects को लेकर प्रश्न उठते रहे है। UK के Oxford university के आरंभिक  trail में इसे प्रभावी नहीं पाया गया, जिसकारण आगे की trail रोक दी गयी ।

इस बीच दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित पत्रिका “the lancet”  ने इस दवा को अपनी लेख मे लाभकारी नहीं बताया और कहा कि यह heart rhythms को अनियमित करता है। लेकिन WHO data safety committee ने कहा कि ऐसा कोई सबूत नहीं मिले है कि HCQ से मृत्यु दर, covid  मरीजो में बढ़ी है और सभी ट्राइल को फिर से शुरू करने को कहा है। इसके बाद The Lancet ने अपने article को वापस ले लिया ।

2. Remdesivir:- इसे 2009 में Hepatitis C के लिए विकसित किया गया था, लेकिन इसमें उतनी सफलता नहीं मिली। Ebola Virus outbreak  के समय फिर से इसे Ebola के प्रभावी इलाज़ की जांच होने लगी।

अप्रैल 2020 से इस दवा को most promising माना जा रहा है , लेकिन अभी तक ऐसा कोई साक्ष्य नहीं मिला है जिससे दावे के साथ कहा जा सके कि यह मैडिसिन कोरोना से लड़ने मे प्रभावी है। फिलहाल USA और भारत मे इसके emergency उपयोग पर ट्राइल जारी है और जापान, UK और भारत  में कोरोना मेँ limited limited use की स्वीकृति मिली है।


3.   Tocilizumab:- यह मुख्यता arthritis के लिए उपयोग किया जाता है चीन, ऑस्ट्रेलिया एवं इटली में कुछ संस्थानो ने इस मैडिसिन को कुछ covid मरीजो पर प्रभावी पाया। इसे कुछ doctor, life saving drugs उन covid मरीजो के लिए बता रही है जो काफी critical condition में है। पर अब तक भारत मेँ इसे covid 19 के इलाज़ के लिए स्वीकृति नहीं मिली है ।

4. AQCH:- भारत की Sun Pharma ने इसका Phase II ट्राइल शुरू किया है, यह phytophrmaceutical (पेड़ पौधो से बना) है, जिसे covid का इलाज़ बताया जा रहा है । इसे डेंगू के इलाज़ के लिए विकसित किया जा रहा था एवं इसने broad anti viral लक्षण दिखये है जिस कारण इसे Covid 19 के लिए प्रभावी माना जा रहा है ।

इन दवाओ के अलावा कुछ अन्य मैडिसिन है जिसे Covid 19 से immunity के लिए प्रभावी माना जा रहा है जिसमे होमियोपथी के Arsenicum album 30 है, जिसे भारत के आयुष मंत्रालय के advisory के बाद कई राज्यो ने Covid के रोकथाम के लिए इसके उपयोग की सलाह दी है । इस मैडिसिन की covid मे कितनी प्रभावी है इसकी कोई study नहीं हुई है । यह मैडिसिन diarrhoea, cough और cold के लिए होमियोपथी के डॉक्टर द्वरा लेने की सलाह दिया जाता रहा है। WHO की इस पर कोई guidelines नहीं है।

इसके अलावा आयुष मंत्रालय (Ministry of AYUSH) ने Covid से बचाव के लिए आयुर्वेदिक immunity बढ़ाने के उपाय बताया है जिसमें चवयनप्राश, हल्दी वाला दूध, काढ़ा जैसे बहुत सारे उपाय बताए गए है।

-------------------------------------------------------


(इस article में लेखक किसी मेडिसिन के लेने या नहीं लेने की कोई recommendation नहीं करते है, कृपया किसी भी मेडिसिन को लेने या नहीं लेने में doctors की सलाह ले )   

वैसे किसी भी मेडिसिन को laboratory से मार्केट में आने में करीब करीब 10 से 12 साल लगते है। विस्तार से जानने के लिए इसे पढे -





कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी पोस्ट करें