मंगलवार, 30 जून 2020

भारत की पहली COVID 19 की वैक्सीन : COVAXIN किस स्टेज में है?


भारत की पहली COVID 19 की वैक्सीन : COVAXIN किस स्टेज में है?

भारत की पहली COVID 19 की वैक्सीन : COVAXIN किस स्टेज में है?
https://twitter.com/BharatBiotech/status/1277661065002676224

भारत कोविड-19 (COVID 19) से जीत के रास्ते में एक कदम और आगे बढ़ चुका है। भारत बायोटेक (Bharat Biotech) का कोविड-19 के लिए vaccine (वैक्सीन / टीका) की human trail (ह्यूमन ट्रायल) की अनुमति ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (CDSCO) से प्राप्त हो चुकी है। इससे पहले कि जितने भी ट्रायल (pre clinical trial) होनी थी वह सभी सफलतापूर्वक कर लिए गए हैं।

 हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक, ICMR और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ विरोलॉजी (National Institute of Virology), पुणे के साथ मिलकर पहला COVID 19 का स्वदेशी वैक्सीन (vaccine) बनाने जा रही है।

 इसके प्री क्लिनिकल ट्रायल यदिखाते हैं यह vaccine सुरक्षित और प्रभावी है। मनुष्य पर ट्रायल जुलाई 2020 से शुरू हो जाएगी। अगर human trail सफल होता है तो जल्द से जल्द यह वैक्सीन हमलोगो के उपयोग के लिए उपलब्ध रहेगी।

 भारत बायोटेक ने इससे पहले पोलियो, रोटावायरस, जापानी इंसेफेलाइटिस और चिकनगुनिया की वैक्सीन बना चुकी है, और यह भारत एवं अन्य देशों में प्रयोग में लाई जाती है।

 जहां कई सारी मैडिसिन शोध संस्थाएं (Research Institute) कोरोनावायरस की दवा की खोज में लगी हुई है, वही कई शोध संस्थाए इसकी प्रभावी वैक्सीन की खोज में लगी है।  कई मैडिसिन ट्राइल स्टेज से आगे बढ़ चुकी है और कई दवाओं को कोविड-19 से लड़ने के प्रति प्रभावी (effective) पाया गया है।

 साधारण शब्दों में बात करे तो, मेडिसिन और वैक्सीन (vaccine) में अंतर यह है कि वैक्सीन जहां बीमारी को होने से रोकती है, वही मेडिसिन बीमारी को ठीक कर, मनुष्य को पुनः स्वस्थ्य बनाती है।  वैक्सीन शरीर को बैक्टीरिया या वायरस से लड़ने में सक्षम बनाती है, वही मेडिसिन बैक्टीरिया या वाइरस से लड़ कर उसे खत्म कर देती है।

अगर वैक्सीन के इतिहास की बात की जाय तो इसका इतिहास काफी पुराना नहीं है। सबसे पहला वैक्सीन 1800 ईस्वी के आसपास एडवर्ड जेनर ने बनाया था और वह Small pox (स्माल पॉक्स / चेचक) के लिए था।  उसके बाद से काफी सारी बीमारियों के vaccine आ चुके हैं इन vaccine से ही मृत्यु दर काफी घटी है तथा हमारी जीवन प्रत्याशा (life expectancy) काफी बढ़ चुकी है।

 प्रश्न यह है कि मेडिसिन एवं वैक्सीन (vaccine) में कौन सबसे कोविड-19 महामारी को फैलने से रोकने में  सबसे ज्यादा प्रभावी हो सकती है।


अगर किसी एक क्षेत्र के सभी लोगों को vaccinate (टीका लगाना) कर दिया जाए तो कोविड-19 जैसी महामारी उस क्षेत्र में किसी को संक्रमित नहीं कर सकती है, जबकि दवा (मेडिसिन) महामारी को फैलने से रोकती नहीं है बल्कि मेडिसिन बीमार शरीर को ठीक करती है। किसी भी महामारी को रोकने में वैक्सीन से ज्यादा असरदायक और कोई नहीं है, क्योंकि कोविड-19 महामारी जैसे किसी भी महामारी से एक बीमार आदमी को मैडिसिन से ठीक करते हैं फिर दूसरा नया व्यक्ति रोगग्रस्त हो जाता है, और यह सिलसिला चलता रहता है। जबकि वैक्सीन इस सिलसिले को तोड़ता है, ब्रेक लगाता है। जितनी जल्दी वैक्सीन आ जाएगी उतना जल्दी से जल्दी हम लोग इस महामारी से बच पाएंगे।

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चाइनीस ऐप (Chinese apps) को प्रतिबंधित (ban) करने से भारत को क्या फायदा है?




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चाइनीस ऐप (Chinese apps) को प्रतिबंधित (ban) करने से भारत को क्या फायदा है?  


अंततः कुल 59 चाइनीस ऐप (Chinese app) को प्रतिबंधित कर दिया गया, जिसमें भारत का सबसे पॉपुलर चाइनीस ऐप टिक टॉक (Tik Tok) भी शामिल है। इन चाइनीस ऐप को प्रतिबंधित करने से भारत को क्या फायदा है?

 भारत में फिलहाल कुल 40 लाख आईटी प्रोफेशनल्स (IT professionals) हैं और हर साल लगभग लगभग 5-6 लाख आईटी ( IT) ग्रेजुएट होते हैं। देखा जाए तो दुनिया की सबसे बड़ी IT फौज भारत में ही है। दुनिया के सबसे बेहतरीन IT platform जैसे google, facebook, Microsoft आदि में सबसे अधिक संख्या मे भारतीय IT Professional ही है। ये भारतीय professionals किसी भी प्रकार के computer या mobile एप्लिकेशन बना सकते है। 

 भारत में इंटरनेट यूज करने वाले की संख्या 50 करोड़ से अधिक है और यह इंटरनेट और उसके एप्लिकेशन का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बाजार है और कुछ दिनो में दुनिया का सबसे बड़ा बाज़ार हो जाएगा। इसलिए देश विदेश की सारी IT कंपनियां खासकर ऐप में भारत के बड़े बाज़ार का फायदा उठाना चाहती है
कोई भी ऐप अपनी कमाई एडवर्टाइजमेंट (advertisement) के जरिए करती है। अगर कोई विदेशी कंपनी है, तो वह अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा अपने देश भेज देती है। एक तरह से कहा जाए तो विदेशी ऐप से काफी बड़ी मात्रा में धन भारत से निकलकर दूसरे देश में जाता है। भारतीय कंपनी के app द्वारा अर्जित आय को भारत से बाहर नहीं जाएगा, वो यही के बाज़ार में खप जाएगा और भारत के GDP को बढ़ाने में योगदान देगा।

 हम लोग लंबे समय डाटा सेफ्टी या डाटा सिक्योरिटी की चर्चा करते आ रहे हैं। य लंबे समय से विवाद में भी रहा है कि किसी भी application का डाटा किस देश के सर्वर में है या नहींइंटरनेट और इंटरनेट ऑफ थिंग्स के हमारे दिनचर्या में बढ़ते उपयोग से, हमारी हर छोटी छोटी जानकारी इन application के माध्यम से बिभिन्न सर्वरो में इकट्ठा होती जाती है। अगर ये सर्वर भारत में है और किसी  भारतीय  कंपनी के पास है तो देश के नियमो के विरुद्ध उन डाटा का गलत प्रयोग नहीं कर सकती है अगर करती है तो उन पर कानूनी कारवाई हो सकती है।

इन डाटा का (data analysis) उपयोग कर बड़े जन समूह की इच्छाओं को जान सकते हैं, उनके पसंद - नापसंद को जान सकते हैं, और इन आंकड़ों को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करती है।  इसलिए आज के समय में डाटा की महत्ता (importance) काफी अधिक है सरकारी भी अपने देश एवं निवासियों के  डेटा की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।

प्रश्न यह है अब की बहुत सारी US की एवं अन्य देशो की भी कंपनियां है, जो भारत में काम कर रही है और भारत की डाटा यूएसए के सर्वर मेँ मौजूद है, तो क्या इन डाटा से भारत को खतरा नहीं है क्या?


इसके लिए हमें यह समझना होगा कि कौन से देश से हमें खतरा है और किस देश से हमें नुकसान होने की संभावना कम है। चीन एक ऐसा देश है, जिसे भारत के कमजोर होने से फायदा है, और यूएसए एक ऐसा देश है जिसे भारत के मजबूत होने से फायदा है। अगर भारत का डाटा चीन की तुलना में US मेँ है तो भारत अधिक सुरक्षित है।

 अपने आपको विडियो, आवाज, लेख आदि से अपने विकारो को अभिव्यक्ति (express) करने वाले जितने भी माध्यम है आईटी (IT) के क्षेत्र में, उनके द्वारा आसानी से देश विरोधी तत्वों को हवा दी जा सकती है। ऐसा कुछ किया जा सकता है, जिससे देश की एकता एवं अखंडता खतरे में पड़ सकती है जैसे कोई इस तरह की वीडियो डालते हैं जिसे कोविड-19 और तेजी से फ़ेल सकता है या सरकार की तेजी से संक्रामण रोकने की कोशिश मेँ बाधा डालता है, या कोई कोई वीडियो इस तरह का हो सकता है जो आपसी भाईचारे को खतरे में डालते हो, या सांप्रदायिक हो, जिससे देश की शांति एवं सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।

 चूंकि चीन में लोकतंत्र का भाव है एवं हर चीज सरकार के नियंत्रण मेँ है, अर्थात वहां की सारी कंपनियां एक तरह से सरकार के कंट्रोल में होती है। कई बार ऐसा समय भी आ सकता है जब चीनी सरकार इन ऐप के माध्यम से भारत में अशांति फैलाने का प्रयास कर सकती हो खासकर जब युद्ध जैसे हालात हो।

 इसके अलावा इस तरह की जितनी भी app होते हैं उसके द्वारा भी भारत के अंदर ही देश विरोधी शक्तिया खड़ी की जा सकती है, जहां ये कंपनियां उन लोगों को अपने पैरोल (payroll) पर रखकर या funding कर भारत विरोधी तत्वों एवं भारत विरोधी आवाजों को हवा दे सकती है।

  मोबाइल application ऐसा नहीं है जिसे कोई अन्य नहीं बना सकता हूं भारत के आईटी सेक्टर में भारतीयों द्वारा इस तरह के आसानी से बनाया जा सकता है। भारत मेँ लाखो की संख्या में IT  professional है। इन चाइनिज app के चले जाने से भारत को कोई नुकसान नहीं है। इसी तरह का पूर्ण रूप से भारतीय app हजारो की संख्या मेँ  पहले से ही google play store में है।  

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