मंगलवार, 19 मई 2020

क्यों सरकार लाभ देने वाली सरकारी कंपनियो को बेचना चाहती है ? Why does the government want to sell profitable comapanies?


क्यों सरकार लाभ देने वाली सरकारी कंपनियो को बेचना चाहती है ? Why does the government want to sell profitable comapanies?

अभी हाल में ही केंद्र सरकार द्वारा देश की दूसरी सबसे बड़ी Oil रीफाइनरी कंपनी BPCL के पूरे 52.98% stake बेचने का मुद्दा चर्चा में हैं। BPCL का भारत मे एक चौथाई मार्केट में कब्जा है । ­­­BPCL रीफाइनरी के साथ साथ ऑइल डिस्ट्रिब्यूशन में भी शामिल है । अगर सरकार के BPCL में वर्तमान  मूल्य की बात करे तो करीब करीब 36 हजार करोड़ रुपये होते है ।

अब लोगो के मन में यह प्रश्न उठते हैं कि जब कोई सरकारी कंपनी लाभ में है तो उसे बेचा क्यों जाय ? इसके अलावा कई लोग पूर्ण रूप से निजीकरण का विरोध  करते है ।

इन सभी प्रश्नों के जवाब जानने के लिए हमे पीछे जाना होगा, भारत मे 1991 से आर्थिक सुधार आरंभ (Economic Reform) हुआ, जीसमे भारत की आर्थिक नीति LPG अर्थात liberalization, Privatization, Globalization पर की और बढ़ने लगा। अब अगर 1991 से तुलना करे तो देखेंगे की गरीबो की संख्या मे कमी आई है, लोगो की आय बढ़ी है , लोग गरीबी से निकल कर माध्यम वर्ग मे शामिल हुए है। देश की आर्थिक स्तिथि मजबूत हुई है । 1985 मे अमेरिका भारत से GDP के अनुसार  18 गुणी बड़ी अर्थव्यवस्था थी और 2019 मे यह गैप काफी कम हुआ है अभी अमेरिका भारत से 7 गुणा बड़ी अर्थव्यवस्था है, भारत अब विश्व की 5वी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था हो गई है।

अब अगर सरकार के मूल कार्यो पर दृष्टि डाली जाय तो सरकार का कार्य बिज़नेस करके लाभ नहीं कमाना है बल्कि सभी लोगो को आर्थिक क्षेत्र मे शामिल करके यह सुनिश्चित करना है कि सभी बाज़ार एवं देश के नियमो का सही से पालन करे, अर्थात एक regulatory कि भूमिका निभाना है ।

सरकार disinvestment (विनिवेश) से प्राप्त राशि का उपयोग आधारभूत ढांचे एवं सामाजिक क्षेत्र जैसे शिक्षा, स्किल आदि मे निवेश कर सकते है जिससे लोगो कि क्षमता मे वृद्धि होगी । सरकार को वैसा माहौल देना है जिससे लोगो मे entrepreneurship आये, छोटी कंपनियां बड़ी होकर वैश्विक हो जाये। 

इस वैश्विक प्रतिस्पर्धा की दौड़ मे हर कंपनीयो को आक्रामक रूप से टेक्नालजी, मैनपावर एवं नए क्षेत्रो मे निवेश करना पड़ता है ताकि अन्य कंपनियो से आगे बनी रहे । जब तक किसी सरकारी कंपनी का किसी सैक्टर मे मोनोपोली रहता है तब तक तो सब ठीक रहता है, कंपनी लाभ मे रहती है  लेकिन जैसे ही अन्य कंपनी  उसी सैक्टर मे आते है तो सरकारी कंपनी प्राइवेट कंपनी से पिछड़ जाते है । इसका एक उदहारण BSNL है, वैसे सरकार को अर्थव्यवस्था के उस क्षेत्र मे निवेश करना चाहिए जहां कोई अन्य प्राइवेट प्लेयर निवेश नहीं कर रहे है एवं वह सैक्टर लोगो के लिए काफी महत्वपूर्ण है और सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण एवं रणनीतिक  है  उसके अलावा सभी सैक्टर को प्राइवेट प्लेयर पर छोड़ देना चाहिए जहां supply एवं demand पर मूल्य निर्धारित होता है बस सरकार को रेग्युलेटर की भूमिका मे बाज़ार पर दृष्टि रखनी चाहिए ।

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