रविवार, 17 मई 2020

सरकार गरीबी दूर करने के लिए अधिक नोट क्यों नही छापती है? Why does the government not print more notes to alleviate poverty?
















सरकार गरीबी दूर करने के लिए अधिक नोट क्यों नही छापती है?

Why does the government not print more notes to alleviate poverty?

सबसे पहले तो यह समझना होगा कि करेंसी नोटो  का काम क्या है। करेंसी नोटो के आने से पहले खरीद विक्री Barter system से होती थी, जैसे किसी को चावल बेचना है और नमक खरीदना है उसी प्रकार अन्य व्यक्ति को चावल खरीदना है और नमक बेचना है तो ये दोनों आपस मे व्यपार कर सकते है। यहाँ एक limitation है अर्थात सब इस व्यापार में शामिल नही हो सकते है या काफी मुश्किलों से व्यापार कर सकते है।

करेंसी नोटो का कार्य खरीद बिक्री को आसानी से सम्पन  करवाना है। 

अब प्रश्न यह उठता है कि सरकार करेंसी नोट या मुद्रा जारी करती है और सरकार गरीबी भी हटाना चाहती है तो क्यो सरकार अधिक मात्रा में करेंसी नोट छाप कर गरीबो में बांट देती है। 

सरकार ऐसा क्यों नही करती है, इसे एक example से देखते है । मान लिया जाय कि किसी अर्थव्यवस्था में लोगो के पास 1000 रुपये की वस्तु है और उसी अर्थव्यवस्था में लोगो के पास 1000 रूपए है। अगर सरकार लोगो को अधिक नोट छाप कर और 1000 रुपये दे देती है तब लोगो के पास 2000 रुपये हो जाएंगे लेकिन वस्तु तो 1000 रुपये का ही रहेगा, तब वस्तु का मूल्य बढ़ जाएगा। इससे महंगाई बढ़ जाएगी। अर्थात  कोई फायदा नही होगा। 

अब प्रश्न यह उठता है कि किसी अर्थव्यवस्था में कितनी मात्रा में मुद्रा होनी चाहिए। इसका एक सिंपल फार्मूला है, बाजार में जितनी मूल्य की वस्तु (product) एवम सेवा (service) है उतनी मात्रा में मुद्रा होनी चाहिए। 


हाल के वैश्विक घटना में जिम्बावे और वेनेजुएला का उदहारण है जहाँ सरकार ने जरूरत से ज्यादा नोट छापने से वहाँ इतनी महंगाई बढ़ गयी कि टोकरी भर कर नोट देने पर मुट्ठी भर समान मिलता था। 

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