मंगलवार, 26 मई 2020

क्या भारत अब तक की सबसे बड़ी आर्थिक मंदी (recession) की और बढ़ रहा है? Is India moving towards the biggest recession ever?

अगर भारत में आर्थिक मंदी (recession) का इतिहास देखा जाय, तो अब तक 3 बार भारत में आर्थिक मंदी आ चुका है, 1958, 1966 और 1980 में। इन सभी का कारण खराब मानसून और उससे उत्पन्न सूखा रहा है, जिससे कृषि (agriculture)  मुख्य रूप से प्रभावित हुई।  उस समय GDP का मुख्य एवं बड़ा हिस्सा कृषि ही था। 

1991 के आर्थिक उदारीकरण (liberalization) के बाद अब तक कोई भी मंदी नहीं आयी है, लेकिन क्या इस साल 2020 में आर्थिक मंदी (recession) आने वाली है?

भारत के top 6 इंडस्ट्रियल (औद्योगिक) राज्य, जो  भारत के 60% इंडस्ट्रियल उत्पादन का भार रखते है , वहाँ की मुख्य इंडस्ट्रियल एरिया या तो रेड जोन में है या ऑरेंज जोन में है। दो महीने के लॉक डाउन ने औद्योगिक उत्पादन पर बुरा असर डाला। शहरी अर्थव्यवस्था की दौड़ पर लगाम लग गई। आर्थिक गतिविधि रुकने से लोगो की आय (इनकम) कम हुई,  उत्पादों (products) की डिमांड कम हुई। 

रिज़र्व बैंक कहता है कि भारत की GDP विकास दर 2020-21 में नकारात्मक रहने वाली है। भारत की मुख्य रेटिंग एजेंसी CRISIL कहती है कि 2020-21 की भारत की GDP विकास दर 5% तक सिकुड़ सकती है, अर्थात, अगर 2019-20 में भारत की GDP 100 रुपये थी तो 2020-21 में 95 रुपये हो जाएगी। 

भारत के GDP के विकास दर में कुछ लगाम तो लगने वाली है पर इसका असर कितना पड़ेगा, इसे जानने के लिये हमें थोड़ा डिटेल में जाना होगा। किसी भी अर्थव्यवस्था को मुख्यता तीन सेक्टर में बांटा जाता है, कृषि (agriculture) , विनिर्माण एवं उद्योग(manufacturing & industry)   और सर्विस। कृषि GDP में लगभग 15% का योगदान देते है और 53% आबादी कृषि पर निर्भर है इसी तरह इंडस्ट्री 23% GDP में योगदान देते है और 22% आबादी निर्भर है एवं सर्विस का सबसे ज्यादा 62% योगदान है और 25% आबादी निर्भर है। 

अब इस कोरोना संकट की बात की जाय तो सबसे ज्यादा प्रभावित मैनुफेक्चरिंग और इंडस्ट्री रही है उसके बाद सर्विस सेक्टर में टूरिज्म, ट्रांसपोर्टेशन, मीडिया आदि रही है। 

इस संकट में तो कुछ मैनुफेक्चरिंग सेक्टर जैसे फार्मा (मेडिसिन) और मेडिकल इक्विपमेंट्स सेक्टर में और तेजी आई है। 

कृषि कार्य पहले की तरह ही जारी है। सर्विस सेक्टर, खास कर IT और कम्युनिकेशन उसी तरह से अपना काम कर रही है, लॉक डाउन में वर्क फ्रॉम होम हो रहा है। 

चीन से नाराज होकर बड़ी बड़ी वैश्विक कंपनियां अपनी मैनुफेक्चरिंग यूनिट को चीन से भारत शिफ्ट करना चाहती है। 
बैंक  अपने इंटरेस्ट रेट को कम कर के लोन को सस्ता बना रहा है और सरकार उस लोन को हर जरूरतमंद व्यक्ति तक उपलब्ध करवाने की कोशिश कर रही है। 

अब आप किस निष्कर्ष में आते है, यह मंदी (recession) कितने दिन चलेगी और कितनी गंभीर है?

मेरे अनुसार, जैसे ही हम कोरोना संक्रमण को कंट्रोल कर लेते है अर्थात उसकी वृद्धि दर को कम या स्थिर कर देते है तो उसके 1-2 महीने में ही अर्थव्यवस्था (economy) रफ्तार पकड़ लेगी और इस financial year के अंतिम दो तिमाही पॉजिटिव ग्रोथ रेट दिखाएगी। 

आपके क्या विचार है, कृपया कमेंट कर बताये। 



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