रविवार, 31 मई 2020

क्या पूर्ण रूप से चीनी उत्पादों (products) का बहिष्कार किया जा सकता है? Can Chinese products be completely boycotted?












क्या पूर्ण रूप से चीनी उत्पादों (Chinese products)  का बहिष्कार किया जा सकता है? 

 Can Chinese products be completely boycotted?


अगर भारत – चीन के व्यापारिक संबंधों को देखे तो चीन भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार (trading partner) है, अर्थात भारत सबसे ज्यादा चीन के साथ ही  व्यापार (trade) करता है, उसके बाद USA और UAE है। 

लेकिन इसमें भी भारत नुकसान में है क्योंकि भारत चीन को निर्यात (export) काफी कम और आयात (import) काफी ज्यादा करता है। 2017-18 में भारत ने चीन को 16.34 बिलियन डॉलर का निर्यात (export) किया, जबकि 68 बिलियन डॉलर का आयात (import) किया। एक्सपोर्ट – इम्पोर्ट के अंतर(difference)  को ट्रेड डेफिसिट कहते है और उस साल का ट्रेड डिफिसिट 51 बिलियन डॉलर का था। 

अभी भी भारत का चीन के साथ ट्रेड डिफिसिट 50 बिलियन डॉलर के आस पास ही है।

अब अगर चीन से आयात (import) को देखा जाय तो भारत 57% आयात (import) केवल electric equipment, phone, computers, machine, engine जैसे चीजो का करता है। 

अब अगर इन्ही वस्तुओं के चीन द्वारा विश्व के सभी देशों में निर्यात (export) के आंकड़े को देखा जाय तो चीन अपने कुल निर्यात का 43%  में केवल ये उत्पाद (product)  ही शामिल है। 

ऐसा नही है कि इन वस्तुओ का चीन से आयात (import) केवल भारत करता है बल्कि पूरा विश्व करता है। इन्ही उत्पादों (Chinese products) की वजह से चीन Global Manufacturing Hub बना हुआ है। चीन का Manufacturing में 28% हिस्सा है जबकि भारत का केवल 3% हिस्सा है। 

चीन के global manufacturing hub बनने के कई कारण है। जिनमें कुछ महत्वपूर्ण है-

1. अधिकांश जटिल नई तकनीक वाले उत्पाद, जैसे स्मार्ट फ़ोन, electric vehicle, solar panel आदि में  rare earth material का प्रयोग होता है, जिसका 90% रिज़र्व और production  चीन में होता है और चीन rare earth material के व्यापार को कंट्रोल करता है। 

2. वहाँ पिछले 30 सालों में एक  शानदार business ecosystem विकसित हुआ है, जिसमें supply chain की दक्षता (efficiency) बढ़ी है। जिससे लागत में कमी आयी है और मार्जिन बढ़ा है। 

3. भारत में जहाँ cost of transportation वस्तु के मूल्य का  3 % है वहीं चीन में 1% है , जिससे लागत कम हो जाती है। 

4. चीन में भारत की तुलना में बैंक के interest rate काफी कम है। जिससे manufacturer को सस्ता लोन मिलता है और वस्तु की कीमत घट जाती है। 

5. भारत के जैसा कठोर labour law वहाँ नही है और ना ही health, safety और pollution को लेकर कड़े कानून है और ना ही उनको ठीक से लागू किया जाता है। 

6. चीन में काफी सस्ता labour उपलब्ध है।

7. चीन समय समय पर अपनी मुद्रा (currency) का undervaluation करती है ,जिससे उसको निर्यात में ज्यादा विदेशी मुद्रा प्राप्त होती है, और ज्यादा फायदा होता है। जबकि भारत में अगर बाजार के supply demand के आधार पर भारतीय मुद्रा का मूल्य थोड़ा भी गिर जाता है तो हमलोग परेशान हो जाते है। 

इन सभी के कारण चीन के manufactured product सस्ते पढ़ते है इसलिए बहुत सारी international companies भी वहाँ अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट डाल रखी है। 

अब हमलोग पुनः मूल प्रश्न पर आते है, क्या भारत चीन की जगह ले सकता है? या अपने चीन से होने वाले आयात (Chinese products) को कम कर सकता है?

इसका जवाब नकारात्मक (negative) नही है, ऐसा हो सकता है और इसके कई आधार भी है।

चीन में जहाँ one child policy के कारण कार्यशील जनसंख्या की औसत आयु बढ़ी है जबकि भारत में यह अधिक युवा है, इसके अलावा कार्यशील जनसंख्या चीन की तुलना में अधिक है। जिससे भारत का लेबर सस्ता और अधिक उत्पादक है। 

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बाजार है , इसे दोहन (tap) करने के लिए बहुत सारी कंपनियां भारत में मैनुफेक्चरिंग यूनिट बैठना चाहती है। बस उन्हें एक अच्छे माहौल देने की जरूरत है। इस समय भारत में research पर काफी ध्यान दिया जा रहा है जो मैनुफेक्चरिंग के लिए force का काम करेगा। 

भारत मे भी transportation के लागत में कमी के लिए water ways, double decker freight train, expressway, dedicated freight corridor बनाया जा रहा है। 

वर्तमान सरकार Make in India, आत्मनिर्भर भारत, मुद्रा लोन जैसी योजनाओ से मैनुफेक्चरिंग बढ़ाने की कोशिश कर रही है।

कोरोना के कारण चीन की विश्व मे काफी किरकिरी हो चुकी है। post covid situation में बहुत सारी बड़े ब्रांड वाली international कंपनी अपनी मैनुफेक्चरिंग गतिविधियों को चीन से भारत shift कर सकती है। 

इस पूरे विश्लेषण (analysis) को देखा जाय तो near future में भारत मैनुफेक्चरिंग में चीन के बराबर खड़ा हो सकता है।

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