शुक्रवार, 22 मई 2020

क्या विदेशी कंपनी का भारत में निवेश (investment) देश को गुलाम बनाने जैसा है ?Is investment of a foreign company like enslaving the country?

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क्या विदेशी कंपनी का भारत में निवेश (investment) देश को गुलाम बनाने जैसा है ?Is investment of a foreign company like enslaving the country?

इस विषय को समझने से पहले थोड़ा दुसरे देश से आने वाले निवेश (investment) को समझ लेते है। कोई विदेशी व्यक्ति या institution भारत में दो प्रकार से invest कर सकते है, पहला FII (Foreign Institutional Investment), जिसमे भारत के शेयर मार्केट मे इन्वेस्ट किया जाता है, इस धन को कभी भी निकाला जा सकता है। दूसरे प्रकार के investment में FDI (Foreign Direct Investment ), इसमें विदेशी निवेशक द्वारा सीधे भारत में अपने पैसे को कोई नई कंपनी खोल कर या किसी कंपनी में सीधे हिस्सेदारी खरीदकर कर निवेश करते है और partnership या ownership ले लेते है ।

भारत मे बहुत सारी विदेशी कंपनियां है, जैसे - हिंदुस्तान लीवर, मारुति सुजुकी, जॉनसन &  जॉनसन , वोडाफोन आदि। उसी प्रकार बहुत सारी भारतीय कंपनियां भी विदेशो में निवेश कर रखी है, जैसे - टाटा मोटर्स, एयरटेल आदि। 

अगर भारत मे किसी विदेशी  product की मांग (demand) है और यदि वह कंपनी भारत मे उत्पादन शुरू करती है तो इससे भारत को ही कई प्रकार से फायदा है, जैसे- प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार उतपन्न होना, GDP बढ़ना, आय बढ़ना, आदि। हमें apple के iphone आयात (import) करने से नुकसान है लेकिन यदि apple कंपनी iphone का उत्पादन भारत में शुरू कर देती है तो हमे फायदा है। 

इस ग्लोबलाइजेशन के दौर में यह उम्मीद करना कि कोई भी देश हर जरूरत की समान बनाने लगे और किसी भी प्रकार का आयात ना करे, वेबकूफ़ी होगी। कोई भी देश WTO के नियमो के विपरीत आयात को प्रतिबंधित नही कर सकता है अन्यथा उसे अन्य देशों एवं संगठनों से प्रतिबंद्ध का सामना करना पड़ेगा और उसका निर्यात भी बंद हो जायेगा। 
इस समय किस देश का पैसा invested है यह उतना मायने नही रखता जितना कि उस निवेश से कितने रोजगार उतपन्न होंगे, GDP कितनी बढ़ेगी, आय कितना बढ़ेगा , मायने रखता है। 

सरकार किसी भी FDI को मंजूरी देने से पहले देश की आर्थिक एवं रणनीतिक सुरक्षा को भी ध्यान रखता है । अभी हाल में ही फेसबुक के रिलायंस जियो में 10% निवेश को आसानी से मंजूरी मिल जाती है लेकिन चीन की किसी कंपनी  द्वारा HDFC बैंक में निवेश को नामंजूर कर दिया जाता है। उदहारण का तातपर्य यह दिखाना है कि सरकार कितनी सतर्क है विदेशी निवेश के मामले में। 
विदेशी निवेश हो जाने के बाद यदि वह निवेश देश की अखंडता एवं आंतरिक शांति के लिए खतरा बनता है तो उसे राष्ट्रीयकृत (nationalised) किया जा सकता है या विदेशी निवेशकों को देश छोड़ कर जाने को कहा जा सकता है। 

विदेशी निवेशक अपने साथ केवल धन नही लाती है बल्कि नई तकनीक, कार्यकुशलता एवं नया बाजार भी लाती है। जापानी कंपनिया भारत मे कार्य करते हुए किसी भी प्रकार का घूस नही देती है। ऐसे बहुत सारे उदहारण भरे पड़े है। 



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