रविवार, 24 मई 2020

कोई भी मेडिसिन तैयार होकर मार्केट में कैसे आता है?


कोई भी मेडिसिन तैयार होकर मार्केट में कैसे आता है?


किसी भी मेडिसिन को laboratory से मार्केट में आने में करीब करीब 10 से 12 साल लगते है। 5000 में 5 ड्रग ही pre clinical trial से human trial में आ पाते है और इन 5 ड्रग्स में 1 ही ड्रग मार्किट में आ पाता है। 

मेडिसिन के लिए 3 गुणों का होना अनिवार्य है, उसका प्रभावी (effective) होना, सुरक्षित होना और मरीजो को उपलब्ध होना। 
ये तीन विशिष्ट गुण किसी मेडिसिन में होने चाहिये, इसके लिए एक लंबी प्रक्रिया अपनायी जाती है। अब इस प्रक्रिया को detail में देखते है। सबसे पहले कोई भी मेडिसिन रिसर्च संस्थान किसी बीमारी के लिए टारगेट को ढूंढती है, यह मुख्यता वायरस या बेक्टिरिया के प्रोटीन होते है। उसके बाद ड्रग डिस्कवरी का स्टेज आता है, इसमें यह टेस्ट किया जाता है कि कौन सा केमिकल कंपाउंड उस टारगेट के रोकने एवं समाप्त करने में प्रभावी है।

प्रभावी केमिकल कंपाउंड मिल जाने के बाद pre clinical trial होता है, इसमें लैबोरेटरी और जानवरों पर trial होता है । इसमें 3 साल लगते है ।

Pre Clinical trial सफल होने पर clinical trial के लिए Drug Regulatory में आवेदन किया जाता है। मंजूरी मिलने पर clinical trial आरंभ होता है। 

इसके 3 फेज है। फेज 1 में 20-80 स्वस्थ्य स्वयंसेवकों (volunteers) पर एक साल तक trial किया जाता है, एवं आंकड़े इकठ्ठे किये जाते है। पॉजिटिव रिपोर्ट आने पत फेज 2 में 100-300 मरीजो पर 2 साल तक उस दवा का ट्रायल किया जाता है। फिर इसके बाद फेज 3 में बड़े स्तर पर हॉस्पिटल एवं क्लीनिक्स में 100-3000 मरीजो पर 3 साल तक ट्रायल किया जाता है। अच्छे रिजल्ट आने पर नई मेडिसिन के लिए एप्लीकेशन किसी भी देश के drug controller के पास की जाती है। 
इसके बाद फिर से फेज 4 की ट्रायल की जाती है जिसमें अन्य अतिरिक्त डाटा, सुरक्षा एवं साइड इफेक्ट्स आदि के आंकड़े इकठ्ठे किये जाते है। 

सारे ट्रायल के रिजल्ट एवं आंकड़े देखने के बाद उसके बीमारी में प्रभावी (effective);एवं सेफ होने पर ही ड्रग  रेगुलेटरी या कंट्रोलर उस मेडिसिन के लिए मंजूरी देता है एवं उसके बाद ही कोई ड्रग मेडिसिन शॉप में आती है।

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