शनिवार, 16 मई 2020

पारसी धर्म, एक संक्षिप्त परिचय

पारसी धर्म को जोरोस्त्रीयन भी कहते है इसके संस्थापक जरथुर्ष्त है । पारसी पुरातन जीवित धर्म मे से एक है। इसकी कुल आबादी एक से सवा लाख के आस पास है जिसमे भारत मे 70% है । भारत मे टाटा, वाडिया  परिवार पारसी है ।

पारसी धार्मिक समूह फारस जिसे परसिया भी कहा जाता था, वर्तमान मे जिसे ईरान कहा जाता है, के निवासी थे। छठी सदी ईस्वी तक पारसी वहाँ का राजधर्म था, अरबी मुस्लिमो से हार के बाद परसियों ने भारत मे शरण ली ।

पारसी एक ईश्वर मे विश्वास करते है जिन्हे आहुरमज्दा कहते है , इसके अलावा एक विपरीत गुणो वाले अहिरिमन की भी मान्यता है । पारसी यह मानते है कि आहुरमजदा और अहिरिमान के बीच निरंतर  संघर्ष चल रहा है जिस के कारण संसार मे सुख और दुख है, लेकिन एक दिन आहुरमजदा अहिरिमन को हरा देगा, तब संसार से दुख समाप्त हो जाएगा।

हिन्दुवों, बौद्धों की तरह मसीहावाद मे विश्वास करते है, अर्थात भविष्य मे संकट के समय ईश्वर खुद को प्रकट करेंगे । ईसाइयो एव मुस्लिमो की तरह judgment day मे विश्वास करते है ।

पारसी अग्नि को पवित्र मानते है उसे ईश्वर के पुत्र के समान मानते है । इनके पुजा स्थल को fire temple कहते है । पारसी अपने नए वर्ष को नवरोज के रूप मे मनाते है । यह 3000 साल पुराना संस्कृति है ।

मृतको का  अंतिम संस्कार इनका सबसे अनूठा है, ये tower of silence मे मृत शरीर को गिद्धो के भोजन के लिए छोड़ देते है ।


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