सोमवार, 25 मई 2020

क्यों सबसे ज्यादा प्रवासी मजदुरो में बिहार के मजदूर है? Why Bihar has the highest number of migrants laborers?

क्यों सबसे ज्यादा प्रवासी मजदुरो में बिहार के मजदूर है? Why Bihar has the highest number of migrants laborers?

Bihar has the highest number of migrants laborer
Bihar has the highest number of migrants laborer
इस कोरोना संकट में प्रवासी मजदुरो पर दुखो का पहाड़ टूट पड़ा है। इन प्रवासी मजदुरो में सबसे बड़ी संख्या बिहार के मजदुरो की है। फिलहाल सभी अपने पैतृक निवास जाना चाहते है।
कई कारण है जिसके चलते बिहार को लोगो को रोजगार के लिए अन्य राज्य जाना पड़ता है। 

बिहार की जनसंख्या घनत्व काफी ज्यादा है, जहाँ भारत की औसत जनघनत्व 382 व्यक्ति प्रति स्क्वायर km है वही बिहार में 1102 है। चूंकि संसाधन सीमित है,  और आबादी अधिक होने से संसाधनों पर ज्यादा बोझ पड़ता है इसलिए लोगो को अपने राज्य छोड़ कर बाहर निकलना पड़ता है। 

अधिक आबादी के कारण कृषि खेतो के आकर छोटे छोटे है जिससें कम आय होती है, इसके अलावा बड़ी संख्या में लोगो के पास खेती की कोई जमीन नही है और उन्हें मजदुरी करना पड़ता है। 

केरल में भी जनघनत्व बिहार के समान है लेकिन वहाँ के हालात बिहार से काफी अच्छे है क्योंकि केरल भारत का सबसे अधिक साक्षरता एवं अधिक skilled वाला राज्य है और बिहार सबसे कम। educated एवं skilled होने के कारण केरल के लोगो को विदेशो एवं भारत के अन्य हिस्सों में भी अधिक सैलरी वाली जॉब मिलती है, जबकि कम साक्षरता होने के कारण बिहार के लोगो को मजदुरी करना पड़ता है। 

केरल में बागवानी, खास कर रबड़, मसाले, कॉफी, चाय, नारियल आदि से अच्छी एवं नियमित आय(income) होती है जबकि बिहार में बागवानी का अभाव है।

केरल भारत का मुख्य टूरिज्म डेस्टिनेशन है जिससे लोगो को रोजगार मिलता है और आय बढ़ती है, जबकि बिहार भारत के लोगो के लिए last choice है टूरिज्म के लिए, जबकि बिहार बौद्ध धर्म का केंद्र है।  इसका मुख्य कारण पर्यटन के जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे, अच्छे हॉटेल, ट्रांसपोर्टेशन के साधन की कमी है, इसके अलावा law & order की कमजोर स्थिति लोगो को जाने के लिए प्रेरित नही करती है। 

बिहार अन्य राज्यों की तुलना में सबसे ज्यादा बाढ़ से पीड़ित है जिससे घर, फसल और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर बर्बाद होती है जिससे लोगो एवं राज्य की आय में अतिरिक्त बोझ पड़ता है। 

बिहार में जातिवादी राजनीति में विकास से पहले जातीय पहचान रही है जिससे हर जाति वालो को नुकसान हुआ है, और हर जाति के लोगो को मजदूरी करने बाहर जाना पड़ा है। 

1970 के दशक में दो नई समस्याए उतपन्न हुई बिहार में, एक वामपंथ का असर बढ़ने लगा दूसरा अपराध बढ़ने लगा, जिससे धीरे धीरे वो फैक्टरी ही बंद हो गयी, फिर लोगो को रोजगार के लिए दूसरे स्थान में पलायन करना पड़ा। इसका एक बड़ा उदहारण डालमियानगर है, जो एक बड़ा इंडस्ट्रियल एरिया हुआ करता था, अब भुतहा शहर बन चुका है। 

1970 के बाद से बिहार के लोगो की अभिवृति में भी काफी परिवर्तन आया है लोगो मे entrepreneurship  में कमी आयी है और सरकारी नौकरी के पीछे भागने लगे। 

entrepreneurship में कमी के कारण वहां के निवासी नए उद्यमिता से पीछे हटने लगे एवं अन्य राज्य के उद्योगपति law & order के कारण कोई भी वहाँ नया निवेश नही करने लगे। 

बिहार का भुअवरुद्ध राज्य होने के कारण शिपिंग, पोर्ट, फिशिंग आदि से होने वाले बिज़नेस अवसर का लाभ नही मिला। 

बिहार के पढ़े लिखे युवा अच्छे भविष्य के लिए बाहर निकल गए , जिससे उसकी बुद्धिमता एवं कार्य अन्य राज्यो को और बेहतर बनाने में ही खप गया। यह एक तरह से brain drain की स्थिति है, जिसका दुष्परिणाम पिछड़ापन के रूप में सामने आया।

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